Thursday, 25 September 2014

आहट है तुम्हारे आने की 

या 

फिर पतझड़ में पेड़ों से पत्ते गिरे है.


या कि हवा गुज़री है सरसराती पत्तों से

 
या कि हवा से संदेशा भेजा है तुमने...


या कि हमेशा की तरह...     


तुमने कुछ किया हीं नहीं

और पेड़ भी दुखी हैं मेरे दुःख से

और हवा आई है अपने आप

मुझे सहलाने को. ..

No comments:

Post a Comment