मुझे निकालने दो समय
इस प्यार के स्वागत के लिए
जो अनचाहे ही आया है।
मुझे निकालने दो समय
ताकि याद कर सकूँ
वह चेहरा जो अचानक उग आया है
विस्मृतियों के जंगल से।
मुझे समय दो ताकि
भाग सकूँ इस प्यार से
जो रोक रहा है
मेरी धमनियों में खून को बहने से।
मुझे समय निकालने दो
ताकि मैं याद कर सकूँ
तुम्हारा नाम, मेरा नाम
और वो जगह जहाँ मैंने जन्म लिया।
मुझे निकालने दो समय
कि जान सकूँ कहाँ मेरी मृत्यु होगी
और कैसे मेरा पक्षी के रूप में
पुनर्जन्म होगा तुम्हारी आँखों में।
मुझे निकालने दो समय
कि पता लगा सकूँ
हवा और तरंगों की अवस्था को
और जान सकूँ दशा नक्षत्रों की...
औरत!! (मैं) जो जीती रही है
भविष्य के मिर्च और अनारदानों में,
मुझे एक देश दो, जो कि
मुझसे भुलवा सके तमाम दूसरे देशों को,
और मुझे दो समय
कि मैं दूर रह सकूँ इस अन्डालुसियन* चेहरे से
इस अन्डालुसियन आवाज़ से
इस अन्डालुसियन मौत से
जो हर तरफ से आती है...
मुझे निकालने दो समय कि
कर सकूँ
भविष्यवाणी बाढ़ की...
औरत!! जो पहले
जादुई किताबों में खुदी हुई थी,
तुम्हारे आने से पहले
दुनिया गद्य थी...
अब जन्मी है उसमें कविता...
मुझे समय दो कि मैं पकड़ सकूँ
मेरा यौवन, जो दौड़ रहा है
मुझसे होकर तुम्हारे अंतस्थल तक...
*स्पेन का दक्षिणी पथरीला तट



