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Sunday, 21 May 2017

जब मैं तुमसे प्यार करता हूँ / निज़ार कब्बानी

जब मैं तुमसे प्यार करता हूँ
तो एक नई भाषा का जन्म होता है,
नए शहर, नए देश ढूँढे जाते हैं
समय नए जन्मे पिल्ले जैसे साँस लेता है,
किताबों के पन्नों के बीच गेहूँ बढ़ता है,
चिड़िया तुम्हारी आँखों से शहद लेकर उड़ती है,
तुम्हारी साँसें भारतीय जड़ी-बूटियों की ख़ुशबू लिए आती हैं
चारों ओर आम बिखर जाते हैं
जंगलों में आग लग जाती है
और नुबियन ड्रम बजने लगता है।

जब मैं तुमसे प्यार करता हूँ तो 
तुम्हारी छातियाँ शर्म से सिकुड़ जाती है,
और फिर वो बिजली और गड़गड़ाहट
तलवार और फिर एक रेतीले तूफान में बदल जाती हैं।
जब मैं तुमसे प्यार करता हूँ तो 
अरब के शहर उछलने लगते हैं 
और दमन के खिलाफ प्रदर्शन करने लगते हैं
और समय जनजातियों के कानूनों से बदला लेता है।

और जब मैं तुमसे प्यार करता हूँ
तो मैं, कुरूपता के विरुद्ध चलता हूँ,
तो मैं, राजाओं के कुशासन के विरुद्ध चलता हूँ,
तो मैं, रेगिस्तान के संस्थागतकरण के विरुद्ध चलता हूँ,
और तब तक मैं तुमसे प्यार करता रहूँगा;
जब तक पूरी दुनिया में बाढ़ नहीं आ जाती
मैं पूरी दुनिया में बाढ़ आने तक तुमसे प्यार करता ही रहूँगा।

जब मैं प्यार करता हूँ / निज़ार कब्बानी

जब मैं प्यार करता हूँ
मुझे लगता है कि मैं समय का राजा हूँ
मैं पृथ्वी और उसके पर मिलने वाली हर वस्तु का स्वामी हूँ
और मैं अपने घोड़े पर बैठ सूर्य तक जाता हूँ।

जब मैं प्यार करता हूँ
मैं तरल प्रकाश बन जाता हूँ
आँखों से अदृश्य हो जाता हूँ 
और नोटबुक में मेरी कविताएँ
मिमोसा और अफीम के खेत बन जाते हैं।

जब मैं प्यार करता हूँ
मेरी उंगलियों से पानी टपकता है
मेरी जीभ पर घास उग जाती है
जब मैं प्यार करता हूँ
मैं समय के बाहर का समय बन जाता हूँ

जब मैं एक औरत से प्यार करता हूँ
सभी पेड़
नंगे पाँव मेरी तरफ़ दौड़ते है...

--निज़ार कब्बानी