Wednesday, 29 May 2019

सभ्यता ने दी है मात्र विवशताएँ,
~~~~~~~~~~~~~~ और वर्जनाएँ।
सभ्यता से परे
आवरण और मुखौटों से परे
हम हो जाते हैं मुक्त, स्वच्छन्द,
और सद्य: स्नात सुबह की तरह मनोरम।


रात हो चुकी है,
दिन भर की ओढ़ी हुई सभ्यता से,
हम थक चुके हैं।


फिर सुबह होगी
प्रातः स्नान से धुल जाएगा,
सभ्यता का मैल।


इसके बाद?
फिर वही दिन
फिर वही सभ्यता
फिर वही विवशता!!

रेनकोट 


निर्देशक रितुपर्णो घोष की यह फिल्म, ओ.हेनरी की प्रसिद्ध कहानी "द गिफ्ट ऑफ़ मैगी" से ली गई है... श्री वेंकटेश फिल्म्स के द्वारा बनाई गई इस फिल्म के डायलॉग्स रितुपर्णो घोष ने लिखे हैं... यह कहानी दो प्रेमियों की है जो कि अलग हो जाते है और फिर एक दिन यूँ ही मिलते हैं और अपने आपको खुश दिखाने की पूरी कोशिश करते हैं लेकिन बिना बताए ही एक-दूसरे की सच्चाई जान लेते है...


यह एक ऐसी फ़िल्म थी जिसको यूँ तो सफलता नहीं मिली थी पर एक ख़ास दर्शक वर्ग को फिल्म पसंद आई... फिल्म में अजय देवगन, ऐश्वर्या रॉय, सुरेखा सीकरी, अन्नू कपूर, मौली गांगुली, समीर धर्माधिकारी आदि ने मुख्य भूमिका निभाई थी... गुलज़ार और रितुपर्णो घोष के लिखे गीतों को शास्त्रीय धुनों पर आधारित संगीत दिया है देबोज्योति मिश्रा ने...* हमारी गलियां होके आना...
* मथुरा नगरपति काहे तुम गोकुल आए...
* शाम ढले सखिया सब लौट गईं सारी अकेले हम नदिया किनारे...
* कितने बरस बीते तुम घर न आए रे...
* पिया तोरा कैसा अभिमान...


x


फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला... ऐश्वर्या रॉय को बेहतरीन अदाकारी के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का क्रिटिक्स चॉईस अवार्ड्स मिला... रितुपर्णो घोष का निर्देशन और अजय देवगन और ऐश्वर्या रॉय के शानदार अभिनय की वजह से यह मन पर छाप छोड़ने वाली फ़िल्म है...


Wednesday, 6 March 2019

छोटे बच्चों को पीठ के बल लेट और पैरों को मोड़ झूला झुलाते हैं जिसे घुघुआ मन्ना या अलिया मलिया के नाम से जानते हैं। झुलाते हुए एक लोरी भी गाते हैं जिसका 5 रूप बड़ी मुश्किल से मुझे याद आया है, अलग अलग क्षेत्रों में इसे अलग तरीके से गाते हैं। ये आमतौर इसे बुआ या मौसी के द्वारा गाया जाता है, ये इसको गाते हुए दिए जाने वाले ताने(गाली) से पता चलता है। अगर मौसी गाती है तो बुआ को गाली देती हैं और मौसी बुआ को...

1)
घुघुआ मन्ना
उपजे धनवा
कान दुनू सोनमा 
रे बौआ तू कथी के
एली के की बेली के
माय बाप चमेली के 
पितिया पितम्बर के
फूफू छिनर कठगूलर के
लाल घर उठे, पुरान घर गिरे।

2)
घुघुआ झूल
कनेर के फूल
बाबू के जूठ कूठ के खाय
मम्मी खाय
मम्मी के झूठ कूठ कौआ खाए
लाल घर उठे, पुरान घर गिरे।

3)
घुघुआ मन्ना, उपजे धन्ना
बाबू खाए दूध-भतवा
कुतवा चाटे पतवा
आबे दे रे कुतवा 
मारबऊ दू लतवा
गे बुढ़िया बर्तन बासन 
सब सरिया के रखिहे तू
नया घर उठे, पुरान घर गिरे।

4)
अलिया गे मलिया गे
घोड़ा बरद खेत खाईछऊ गे
कहाँ गे?
डीह पर गे
डीहsक रखवार के गे?
बाबा गे
बाबा गेलखुन पूर्णिया गे 
लाल लाल बिछिया लैथुन गे
कोठी पर झमकैथुन गे
लाल घर उठे, पुरान घर गिरे। 

5)
तोरा मायो न झुलैलकऊ
तोरा बापो न झुलैलकऊ
तोरा तार तर वाली मौसियो नई झुलैलकऊ
तोरा हमहीं झुलैलियऊ
लाल घर उठे, पुरान उठे।
छोटे बच्चों को पीठ के बल लेट पैरों को मोड़ झूला झुलाते हैं जिसे घुघुआ मन्ना या अलिया मिल्य के नाम से  
छोटे बच्चों को पीठ के बल लेट पैरों को मोड़ झूला झुलाते हैं जिसे घुघुआ मन्ना या अलिया मिल्य के नाम से  
छोटे बच्चों को पीठ के बल लेट और पैरों को मोड़ झूला झुलाते हैं जिसे घुघुआ मन्ना या अलिया मलिया के नाम से जानते हैं। झुलाते हुए एक लोरी भी गाते हैं जिसका 5 रूप बड़ी मुश्किल से मुझे याद आया है, अलग अलग क्षेत्रों में इसे अलग तरीके से गाते हैं। ये आमतौर इसे बुआ या मौसी के द्वारा गाया जाता है, ये इसको गाते हुए दिए जाने वाले ताने(गाली) से पता चलता है। अगर मौसी गाती है तो बुआ को गाली देती हैं और मौसी बुआ को...

1)
घुघुआ मन्ना
उपजे धनवा
कान दुनू सोनमा 
रे बौआ तू कथी के
एली के की बेली के
माय बाप चमेली के 
पितिया पितम्बर के
फूफू छिनर कठगूलर के
लाल घर उठे, पुरान घर गिरे।

2)
घुघुआ झूल
कनेर के फूल
बाबू के जूठ कूठ के खाय
मम्मी खाय
मम्मी के झूठ कूठ कौआ खाए
लाल घर उठे, पुरान घर गिरे।

3)
घुघुआ मन्ना, उपजे धन्ना
बाबू खाए दूध-भतवा
कुतवा चाटे पतवा
आबे दे रे कुतवा 
मारबऊ दू लतवा
गे बुढ़िया बर्तन बासन 
सब सरिया के रखिहे तू
नया घर उठे, पुरान घर गिरे।

4)
अलिया गे मलिया गे
घोड़ा बरद खेत खईछऊ गे
कहाँ गे?
डीह पर गे
डीहsक रखवार के गे?
बाबा गे
बाबा गेलखुन पूर्णिया गे 
लाल लाल बिछिया लैथुन गे
कोठी पर झमकैथुन गे
लाल घर उठे, पुरान घर गिरे। 

5)
तोरा मायो न झुलैलकऊ
तोरा बापो न झुलैलकऊ
तोरा तार तर वाली मौसियो नई झुलैलकऊ
तोरा हमहीं झुलैलियऊ
लाल घर उठे, पुरान उठे।