छोटे बच्चों को पीठ के बल लेट और पैरों को मोड़ झूला झुलाते हैं जिसे घुघुआ मन्ना या अलिया मलिया के नाम से जानते हैं। झुलाते हुए एक लोरी भी गाते हैं जिसका 5 रूप बड़ी मुश्किल से मुझे याद आया है, अलग अलग क्षेत्रों में इसे अलग तरीके से गाते हैं। ये आमतौर इसे बुआ या मौसी के द्वारा गाया जाता है, ये इसको गाते हुए दिए जाने वाले ताने(गाली) से पता चलता है। अगर मौसी गाती है तो बुआ को गाली देती हैं और मौसी बुआ को...
1)
घुघुआ मन्ना
उपजे धनवा
कान दुनू सोनमा
रे बौआ तू कथी के
एली के की बेली के
माय बाप चमेली के
पितिया पितम्बर के
फूफू छिनर कठगूलर के
लाल घर उठे, पुरान घर गिरे।
2)
घुघुआ झूल
कनेर के फूल
बाबू के जूठ कूठ के खाय
मम्मी खाय
मम्मी के झूठ कूठ कौआ खाए
लाल घर उठे, पुरान घर गिरे।
3)
घुघुआ मन्ना, उपजे धन्ना
बाबू खाए दूध-भतवा
कुतवा चाटे पतवा
आबे दे रे कुतवा
मारबऊ दू लतवा
गे बुढ़िया बर्तन बासन
सब सरिया के रखिहे तू
नया घर उठे, पुरान घर गिरे।
4)
अलिया गे मलिया गे
घोड़ा बरद खेत खाईछऊ गे
कहाँ गे?
डीह पर गे
डीहsक रखवार के गे?
बाबा गे
बाबा गेलखुन पूर्णिया गे
लाल लाल बिछिया लैथुन गे
कोठी पर झमकैथुन गे
लाल घर उठे, पुरान घर गिरे।
5)
तोरा मायो न झुलैलकऊ
तोरा बापो न झुलैलकऊ
तोरा तार तर वाली मौसियो नई झुलैलकऊ
तोरा हमहीं झुलैलियऊ
लाल घर उठे, पुरान उठे।
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