Saturday, 27 September 2014

किसी दिन तो ये आग जलाएगी तुझको,
किसी दिन तो खाक़ होगा तू भी मेरी तरह!!

Thursday, 25 September 2014

आहट है तुम्हारे आने की 

या 

फिर पतझड़ में पेड़ों से पत्ते गिरे है.


या कि हवा गुज़री है सरसराती पत्तों से

 
या कि हवा से संदेशा भेजा है तुमने...


या कि हमेशा की तरह...     


तुमने कुछ किया हीं नहीं

और पेड़ भी दुखी हैं मेरे दुःख से

और हवा आई है अपने आप

मुझे सहलाने को. ..

एकला चलो रे

मेरे मन सुबह से बस एक ही पंक्ति घूम रही है:

"एकला चलो रे"

ये कौन मुझसे कह रहा है... कौन मुझे बता रहा है... कौन है जो समझा रहा है?



Monday, 1 October 2012


             या कुन्देन्दु-तुषारहार-धवला या शुभ्र -वस्र्त्रावृता या वीणावरदण्डमंडितकरा या श्वेतपद्मासना........