मेरे बच्चे,
जल्द ही तुम कानूनन बालिग़ हो जाओगे और कल के बाद हमारे देश का संविधान तुम्हें अपना नेता चुनने की आज़ादी देता है, लेकिन मेरा मन तुम्हें कभी बालिग़ नहीं मानेगा। मेरे लिए तुम हमेशा मेरे वही छोटे से बच्चे रहोगे जिसे अपने हाथों खाना नहीं आता, अपने पैरों चलना नहीं आता, क्योंकि ये माँ का मन है जिसे बच्चा हमेशा बच्चा ही लगता है। माँ का मन हमेशा सशंकित रहता है, उसे हमेशा लगता रहता है कि कहीं उसके बच्चे को कोई नुकसान न पहुँचा दे, कहीं उसके पाँव न लड़खड़ा जाय, कहीं कोई उसे ठग न ले, कहीं उसे कोई चोट न पहुँचा दे। अभी तुम मेरी चिंता, मेरे डर को नहीं समझ सकोगे क्योंकि अभी इस बात को समझने लायक तुम्हारी उम्र नहीं हुई लेकिन समझ जाओगे जब तुम्हारे भी बच्चे होंगे। ज़िम्मेवारी से सोचोगे तो यह चिंता छोटे बहन-भाई के लिए अब भी होगी, कई बार छोटी-छोटी बातों में तुम्हें उनकी फ़िक्र करते मैंने देखा भी है।
ये सब मैं तुम्हें हमेशा से कहती आई हूँ तो तुम सोचोगे इसमें नया क्या है, जो सालों से कहती आई हूँ उसे आज फिर से कहने का क्या मतलब। आज हम तुमसे कुछ और बातें भी करेंगे हालाँकि ये सब भी कोई नई बात नहीं है, कम ही सही लेकिन इन बातों का ज़िक्र भी हम तुमसे करते आए हैं।
बात ये कि हमारे समाज में हमेशा से लड़कियों को सीख दी जाती रही है कि ये करो वो करो, ये न करो वो न करो, देर तक बाहर न रहो, ऐसे कपड़े पहनो, वैसे न पहनो, फिर भी अगर कहीं कुछ भी ग़लत लड़कियों के साथ हुआ तो भी उन्हें ही दोषी माना जाता है, देर तक बाहर क्यों थी, ऐसे कपड़े क्यों पहने आदि आदि। लेकिन तुम ही बताओ कि जब तुम देर तक अपने दोस्तों के साथ बाहर रह सकते हो तो तुम्हारी बहन या दूसरी लड़कियाँ और उसके दोस्त क्यों नहीं? तुम पढ़ाई, नौकरी या घूमने के लिए बाहर जा सकते हो तो लड़कियाँ क्यों नहीं? तुम्हें जब शॉर्ट्स या जीन्स पहनने पर कोई कुछ नहीं तो उन पर ही ये पाबंदी क्यों?
तो ये बता दूँ कि ये सब पाबंदी उन पर लड़कों की वजह से लगाई जाती है क्योंकि वे सुरक्षित नहीं। ऐसा नहीं कि शॉर्ट्स की वजह से ही उनके साथ कुछ ग़लत होता है बल्कि ये सब ग़लत शिक्षा की वजह से होता है। हमेशा से इज़्ज़त का सारा भार लड़कियों के कंधे रहा। उन्हें बताया गया कि ऐसे रहो लेकिन बेटों को नहीं कहा गया कि तुम क्या करो। उनको नहीं कहा गया कि औरत पर किसी भी तरह की ज़बरदस्ती नहीं करना। उन्हें नहीं बताया कि कोई लड़की जॉब से, पढ़ाई से या शॉपिंग करके देर रात लौट रही है तो वो तुम्हारी प्रॉपर्टी नहीं है। उसे किसी ने नहीं बताया कि छोटे कपड़े उसने अगर पहने तो ये उसकी सुविधा है न कि तुम्हारे लिए उसकी तरफ से कोई आमंत्रण है।
मैं तुमसे कहना चाहती हूँ कि कभी कोई ऐसा काम नहीं करना जिससे किसी भी लड़की को ज़रा भी प्रॉब्लम हो। कभी कोई भी लड़की/महिला जो तुम्हारे आसपास से गुज़रे तो उसे तुम्हारे वहाँ होने पर कुछ भी ग़लत न लगे। तुमसे कभी ऐसी कोई भूल न हो जिससे किसी की मर्यादा को ठेस पहुँचे। तुम्हारी तरफ़ से वह राह निकले जिसपर चलकर लड़कियाँ सुरक्षित आगे बढ़ सकें। मैं तुम पर हर लड़की की सुरक्षा की ज़िम्मेवारी नहीं डाल रही हूँ बल्कि उन्हें उनकी मर्ज़ी से जीने देने को कह रही हूँ। मैं ये सब सिर्फ तुमसे ही नहीं बल्कि तुम्हारे दोस्तों और तुम्हारी पीढ़ी के सारे बच्चों से कह रही हूँ, जिनके हाथों में हमारा कल सुरक्षित है।
मुझे पता है कि तुम मेरे ज़िम्मेदार बच्चे हो लेकिन ये माँ का मन है न, हमेशा डरा ही रहता है। तुम ज़िन्दगी में बहुत आगे जाओ, तुम्हें बहुत सारी ऊँचाइयाँ मिले। जिस भी रास्ते जाओ मंज़िल तुम्हारे स्वागत में खड़ी रहे। इस सफ़र में जो भी तुमसे मिलें उन सबको तुम पर गर्व हो, सबका प्यार और आशीर्वाद हमेशा तुम्हें मिले।
अब तुम्हें देश का कानून अपना वोटर मानता है और मुझे फ़िलहाल इतने बड़े तो लग ही रहे हो कि मेरे मन की बात को समझ सको।
:)
ढेरों शुभकामना के साथ:
तुम्हारी मम्मी
जल्द ही तुम कानूनन बालिग़ हो जाओगे और कल के बाद हमारे देश का संविधान तुम्हें अपना नेता चुनने की आज़ादी देता है, लेकिन मेरा मन तुम्हें कभी बालिग़ नहीं मानेगा। मेरे लिए तुम हमेशा मेरे वही छोटे से बच्चे रहोगे जिसे अपने हाथों खाना नहीं आता, अपने पैरों चलना नहीं आता, क्योंकि ये माँ का मन है जिसे बच्चा हमेशा बच्चा ही लगता है। माँ का मन हमेशा सशंकित रहता है, उसे हमेशा लगता रहता है कि कहीं उसके बच्चे को कोई नुकसान न पहुँचा दे, कहीं उसके पाँव न लड़खड़ा जाय, कहीं कोई उसे ठग न ले, कहीं उसे कोई चोट न पहुँचा दे। अभी तुम मेरी चिंता, मेरे डर को नहीं समझ सकोगे क्योंकि अभी इस बात को समझने लायक तुम्हारी उम्र नहीं हुई लेकिन समझ जाओगे जब तुम्हारे भी बच्चे होंगे। ज़िम्मेवारी से सोचोगे तो यह चिंता छोटे बहन-भाई के लिए अब भी होगी, कई बार छोटी-छोटी बातों में तुम्हें उनकी फ़िक्र करते मैंने देखा भी है।
ये सब मैं तुम्हें हमेशा से कहती आई हूँ तो तुम सोचोगे इसमें नया क्या है, जो सालों से कहती आई हूँ उसे आज फिर से कहने का क्या मतलब। आज हम तुमसे कुछ और बातें भी करेंगे हालाँकि ये सब भी कोई नई बात नहीं है, कम ही सही लेकिन इन बातों का ज़िक्र भी हम तुमसे करते आए हैं।
बात ये कि हमारे समाज में हमेशा से लड़कियों को सीख दी जाती रही है कि ये करो वो करो, ये न करो वो न करो, देर तक बाहर न रहो, ऐसे कपड़े पहनो, वैसे न पहनो, फिर भी अगर कहीं कुछ भी ग़लत लड़कियों के साथ हुआ तो भी उन्हें ही दोषी माना जाता है, देर तक बाहर क्यों थी, ऐसे कपड़े क्यों पहने आदि आदि। लेकिन तुम ही बताओ कि जब तुम देर तक अपने दोस्तों के साथ बाहर रह सकते हो तो तुम्हारी बहन या दूसरी लड़कियाँ और उसके दोस्त क्यों नहीं? तुम पढ़ाई, नौकरी या घूमने के लिए बाहर जा सकते हो तो लड़कियाँ क्यों नहीं? तुम्हें जब शॉर्ट्स या जीन्स पहनने पर कोई कुछ नहीं तो उन पर ही ये पाबंदी क्यों?
तो ये बता दूँ कि ये सब पाबंदी उन पर लड़कों की वजह से लगाई जाती है क्योंकि वे सुरक्षित नहीं। ऐसा नहीं कि शॉर्ट्स की वजह से ही उनके साथ कुछ ग़लत होता है बल्कि ये सब ग़लत शिक्षा की वजह से होता है। हमेशा से इज़्ज़त का सारा भार लड़कियों के कंधे रहा। उन्हें बताया गया कि ऐसे रहो लेकिन बेटों को नहीं कहा गया कि तुम क्या करो। उनको नहीं कहा गया कि औरत पर किसी भी तरह की ज़बरदस्ती नहीं करना। उन्हें नहीं बताया कि कोई लड़की जॉब से, पढ़ाई से या शॉपिंग करके देर रात लौट रही है तो वो तुम्हारी प्रॉपर्टी नहीं है। उसे किसी ने नहीं बताया कि छोटे कपड़े उसने अगर पहने तो ये उसकी सुविधा है न कि तुम्हारे लिए उसकी तरफ से कोई आमंत्रण है।
मैं तुमसे कहना चाहती हूँ कि कभी कोई ऐसा काम नहीं करना जिससे किसी भी लड़की को ज़रा भी प्रॉब्लम हो। कभी कोई भी लड़की/महिला जो तुम्हारे आसपास से गुज़रे तो उसे तुम्हारे वहाँ होने पर कुछ भी ग़लत न लगे। तुमसे कभी ऐसी कोई भूल न हो जिससे किसी की मर्यादा को ठेस पहुँचे। तुम्हारी तरफ़ से वह राह निकले जिसपर चलकर लड़कियाँ सुरक्षित आगे बढ़ सकें। मैं तुम पर हर लड़की की सुरक्षा की ज़िम्मेवारी नहीं डाल रही हूँ बल्कि उन्हें उनकी मर्ज़ी से जीने देने को कह रही हूँ। मैं ये सब सिर्फ तुमसे ही नहीं बल्कि तुम्हारे दोस्तों और तुम्हारी पीढ़ी के सारे बच्चों से कह रही हूँ, जिनके हाथों में हमारा कल सुरक्षित है।
मुझे पता है कि तुम मेरे ज़िम्मेदार बच्चे हो लेकिन ये माँ का मन है न, हमेशा डरा ही रहता है। तुम ज़िन्दगी में बहुत आगे जाओ, तुम्हें बहुत सारी ऊँचाइयाँ मिले। जिस भी रास्ते जाओ मंज़िल तुम्हारे स्वागत में खड़ी रहे। इस सफ़र में जो भी तुमसे मिलें उन सबको तुम पर गर्व हो, सबका प्यार और आशीर्वाद हमेशा तुम्हें मिले।
अब तुम्हें देश का कानून अपना वोटर मानता है और मुझे फ़िलहाल इतने बड़े तो लग ही रहे हो कि मेरे मन की बात को समझ सको।
ढेरों शुभकामना के साथ:
तुम्हारी मम्मी

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