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Tuesday, 25 April 2017

चाक देखा है?

सुनो!!
चाक देखा है?
वही चाक कुम्हार वाला
जो नाचता रहता है
एक कील पर
जो स्थिर रहता है
मगर उसके ऊपर गति होती है
जिससे होता है सृजन
है न?

बस
तुम वही कील बनो
अपने भीतर उसी कील को पा लो
जहाँ तुम स्थिर ही रहो
और अपने भीतर स्थित कील के सहारे
नाचने दो संसार को
ताकि सृष्टि में होता रहे
सृजन
होता रहे
नवनिर्माण...
(एक सलाह)